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Thursday, November 20, 2008

दीपावली


दीपाली

आया रौंशनी का त्यौहार, कुछ जगह दीवाली तो कुछ जगह दीवाला !

जले कुछ लोग दीँये की भाँति, मगर जग-मग हुआ किसका आला?


मनाई कुछ लोगो ने दीवाली पूरे बरस इस तरह,

किसी माँ के बच्चे को पटाखे में ही बदल डाला !


दीँये सही, रौंशनी सही, आओ बाँटे मुस्कराहँटे ऐसी,

वरना पूछेगा पहली-दूसरी क्लास का बच्चा-बच्चा

आए थे अगर "तारे ज़मीन पर" फ़िर भी कम क्यों है उजाला ?


शुभ दीपावली - २००८

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