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Saturday, July 18, 2009

जिंदगी की दौड

जिंदगी की दौड

जिंदगी की दौड़, थकान तो होगी

निकली है अगर धूप तो शाम भी होगी |


खुदा मन्दिर में, भगवान मस्जिद में

देखना एक दिन यह बातें आम होगी |


बोतलें खोल कर पी हमने बरसो

कब यह पता था तुम्हारी आँखे जाम होगी |


तुम्हारा इंतज़ार और वोह पीपल का पेड़,

पत्तियां चल बसी, अब जड़े तमाम होगी |


- गौरव गुप्ता, २५ जुलाई, २००८

5 comments:

GANGA DHAR SHARMA said...

Nice .

sakhi with feelings said...

achi gazal

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत बढिया. शुभकामनायें.

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Amit Bhatnagar said...

क्या लिख डाला यार

बोतलें खोल कर पी हमने बरसो
कब यह पता था तुम्हारी आँखे जाम होगी |

सर कविताए एकदम खतरनाक (इन्दौर की भाषा में) लिखते हो।

बहुत दिनो बाद अपनी पसन्द की कविताए पढने को मीली, तो गालिब का शेर याद आ गया, सो वह आपकी कविताओ को नज़र

"रगो में दौडते फिरने के हम नहीं कायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहु क्या हैं"