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Wednesday, August 5, 2009

कैसी लगती हूँ मै ?

कैसी लगती हूँ मै ?

तेरह कि थी तुम
जब से मेरे पास आती रही हो
पूँछती थी,
कैसी लगती हूँ मै ?
और मै तुम्हे सिर्फ़ देखता था,
मगर रहता चुप-चाप

मुझे याद है
जब तुम पहन कर आयी थी
पहली बार
कांनो मे बाली
और होठों पर लाली
कैसी लगती हूँ मै ?
यही पूँछा था न तुमने ?

आज फ़िर आयी हो
इतने सालों के बाद
सर पर लाल रंग की चूनर
और गँहनो से सजी,
सिंदूर और मंगलसूत्र से
कुछ क्षणो दूर

शायद आज आखिरी बार
उसी प्रश्न के साथ
कैसी लगती हूँ मै ?
मै आज भी निरुत्तर खड़ा हूँ
क्या करूँ, आइना हूँ,
आइने कि तरह टूटा पड़ा हूँ ।

Monday, August 3, 2009

उमडा है दर्द सीने मे

उमडा है दर्द सीने मे


उमडा है दर्द सीने मे,आसूँओ की बारिश जरूर होगी

ज़मीन प्यासी थी, मेरे पसीने की बारिश जरूर होगी


इल्जाम--बेवफाई, सिर्फ़ हम पर न लगाओ दोस्त

देखना तुम्हारी वफाओ की भी, एक दिन नुमाइश जरूर होगी


तुम मेरे मुक्कद्दर का फ़ैसला, सिर्फ़ वक्त पर न छोड्ना

डरता हू कि कुछ न कुछ साजिश जरूर होगी


अजान खत्म हुई और सारे नमाज़ी भी चले गये

मै फिर भी रुका हु, कुछ और ख्वहिश जरूर होगी


गर परवाना खुद आ कर जला, इस लौ मै

सज़ा न दो उसे, कुछ तो इसमे कशिश जरूर होगी


-गौरव गुप्ता ३,अगस्त, २००९