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Monday, August 3, 2009

उमडा है दर्द सीने मे

उमडा है दर्द सीने मे


उमडा है दर्द सीने मे,आसूँओ की बारिश जरूर होगी

ज़मीन प्यासी थी, मेरे पसीने की बारिश जरूर होगी


इल्जाम--बेवफाई, सिर्फ़ हम पर न लगाओ दोस्त

देखना तुम्हारी वफाओ की भी, एक दिन नुमाइश जरूर होगी


तुम मेरे मुक्कद्दर का फ़ैसला, सिर्फ़ वक्त पर न छोड्ना

डरता हू कि कुछ न कुछ साजिश जरूर होगी


अजान खत्म हुई और सारे नमाज़ी भी चले गये

मै फिर भी रुका हु, कुछ और ख्वहिश जरूर होगी


गर परवाना खुद आ कर जला, इस लौ मै

सज़ा न दो उसे, कुछ तो इसमे कशिश जरूर होगी


-गौरव गुप्ता ३,अगस्त, २००९


4 comments:

ओम आर्य said...

bahut hi sahi andaj me apani baat rakhi hai atisundar

AlbelaKhatri.com said...

bahut khoob !

हिन्दी साहित्य मंच said...

bhut sundar rachna, dil ko chhu liya.

M VERMA said...

अजान खत्म हुई और सारे नमाज़ी भी चले गये
मै फिर भी रुका हु, कुछ और ख्वहिश जरूर होगी
बेहतर अन्दाज़ ए बयाँ
खूबसूरत रचना