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Wednesday, July 7, 2010

खुशबुओ की तितलियों से..

खुशबुओ की तितलियों से
मुलाकात हो गयी है
मिले हो जब से तुम
कुछ बात सी हो गयी है|

दूरियां बढी तो,
आंखो से बरसा नमक,
भीगे अब सपने
बरसात सी हो गयी है|

इश्क़ के मदरसे से
आयी है ताज़ा ताज़ा खबर
शबाब आया है अहिस्ता
और हया़ की शुरुआत हो गयी है|

धूपँ के हर इक किरण से
मांगा था तेरा साथ
एक बार बादल हटा और देख
क्या मेरी हालत हो गयी है|

: गौरव : ७ जुलाई २०१०

1 comment:

Rajeev Bharol said...

वाह. बहुत सुंदर रचना.