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Sunday, September 12, 2010

मुझे तुमसे सख्त शिकायत है

मुझे तुमसे सख्त शिकायत है


हवा,
जब तुम,थम जाती हो ना !
मौसम और उसके मिजाज़ का पता नही चलता
शहर मे उल्फ़त हो, आगाज़ का पता नही चलता

हवा,
जब तुम, थम जाती हो ना !
बादल, मेरे शहर के बाहर
डेरे डाले बैठे रह्ते है
तुम्हारी उंगलियाँ छूट गयी
हमेशा यही कहते है

हवा,
जब तुम, थम जाती हो ना !
उनकी ज़ुल्फ़े नही गिरती
मेरी पेशानी पर, मेरे चेहरे पर
आँखों मे, आँखों से
बाट जोहते रहते है



हवा,
तुम थोड़ा चला करो !
शहर के आंगन में
बादलों की बारात होगी
दिन तो गुज़रा, सूखा
मगर रात बरसात होगी

हवा,
तुम थोड़ा चला करो !
उन गिरती हुई ज़ुल्फ़ों को हटाने के बहाने
अब जब मुलकात होगी,
इक नयी बात होगी


मुझे तुमसे सख्त शिकायत है
हवा,
तुम थोड़ा चला करो !

4 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

Amit Bhatnagar said...

वाह क्या बात हैँ, बहुत उम्दा - हवा तुम चलते रहना

D said...

Beautiful.... i loved it...

Nisha said...

ye sab panktiyan bahut bahut pyari lagi.. agar waqt mile to mere blog par aaiyega.. aisi hi ek purani post hai vaha bi.. kuch isi tarah hawa se baaten karti hui 'o tej thandi hawa' shirshk k saath. :-)