Pages

Wednesday, October 27, 2010

लम्हें

साथ तेरे बितायें लम्हें
जैसे चाँदनी की चाशनी चाटी है
मुलाकाते रही वोह अधूरी सी
जबसे बातों कि पतंग काटी है |

कैसे कम हो यह दूरियां
जलाती है यह दूरियां
दिल हो दिया जैसे
यादें जैसे बाती है |

तेरे मिलने से लेकर,
तेरे फिर मिलने तक
बुनियाद थी हर शाम
रात जैसे मियादों मे काटी है |

तेरि पलको से हुई बारिश
उठी सौंधि खुशबू कही से
भीगी मेरी भी पलके,
दिल तब से माटी है |

साथ तेरे बितायें लम्हें
जैसे चाँदनी की चाशनी चाटी है |

-गौरव (२७ अक्टूबर २०१० )

7 comments:

shweta said...

So deep and thoughtful ...! May I know the inspiration for these feelings ... have you experienced this?

shweta said...

Its Nice and well expressed. I like it. :)

ashwin said...

ati uttam...

Nisha said...

har pankti padh kar aisa lagta hai k ye sabse khubsurat hai.. bhut jyada sundar likhahai.

GauRav said...

Thanks to all. हौसला-अफ़ज़ाई के लिये शुक्रिया

kj said...

Ek din roorkee ka phir ji liya.
Apna bhavishya surkshit hatho me hone ka ahasas kara diya...............Geeat.....

D said...

Very beautiful... :)