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Thursday, November 4, 2010

रोशनी

अमावस की देह्लीज पर रोशनी कर दे
एक टुकड़ा उजाले का, दिया-बाती धर दे

आपके घर की रोशनी हो बुलन्द इतनी
अगर चले हवाँ तो मेरे घर असर कर दे

जिसे डर नहीं हवाओं का उस दिए का साथ दे
किसी के रात के सफ़र को सहर कर दे |

4 comments:

आशीष मिश्रा said...

आपको सपरिवार दिपोत्सव की शुभकामनाएँ

अजय कुमार said...

प्रदूषण मुक्त दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

Nisha said...

har pankti bahut sundar hai.. shukriya.
aapko bhi dipwali ki dheron shubkaamnaayen.:)

Sushma said...

is se achi diali ki shubh kaamna kya ho sakti hai... :-)

apke andar ke kavi se milke acha laga...

- Sushma Hegde