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Wednesday, November 24, 2010

काश

काश
बिटियाँ तुम नन्हीं ही रहती
तो सागर किनारे चलते
लहरों को हाथों से पकड़ते
साथ सीपियाँ बटोरते

काश
बिटियाँ तुम नन्हीं ही रहती
हम रेत के घरोंदे बनाते
जो वह गिर जाते तो
तुम्हे, कुछ ले दे कर मनाते

काश
बिटियाँ तुम नन्हीं ही रहती
तुम्हारे जन्म-दिन पर
जब तुम मुंह फुलाती
हम लाल गुब्बारे फुलाते
जिन खिलौनों को देख
तुम खुश होती
हम वह खिलौने बन जाते

काश
बिटियाँ तुम नन्हीं ही रहती
तुम्हारे नन्हें बचपन में
हमने अपना बचपन बोया है
जबसे तुम बड़ी हुई हो ,
सिर्फ़ तुमने नहीं,
हमने भी अपना बचपन खोया है |


गौरव : २४ नवम्बर २०१०

5 comments:

वन्दना said...

जबसे तुम बड़ी हुई हो ,
सिर्फ़ तुमने नहीं,
हमने भी अपना बचपन खोया है |

काश ऐसा हो पाता मगर बेटियां जल्द बडी हो जाती हैं और सच कहा "सिर्फ़ तुमने नहीं,
हमने भी अपना बचपन खोया है "
बेहद भावप्रवण प्रस्तुति।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

'sirf tumne hi nahi
hamne bhi apna bachpan khoya hai'
aankhon me aansoo la deti hai kavita !

preetiloonkeriitd said...

Amazing!!!!!!!!!!!!!!!!!!
Betiyaan hoti hi itni pyaari hain.......
The best gift from GOD anyone can get...
Aise lagta hain jaise har maa-baap ke man ki baat ko shabdo ke taane-baane mein bun diya hain aapne...........
Hats off to u Bhaiya!!!!!!!!!!!!!!!

Archana said...

Excellent !!

Even my 9year daughter felt touched.

Piece of my mind... said...

What pure thoughts..Gaurav very sensitive thoughts.
जबसे तुम बड़ी हुई हो ,
सिर्फ़ तुमने नहीं,
हमने भी अपना बचपन खोया है |

I have no words to describe. Keep it up.