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Saturday, January 15, 2011

शुभकामनाँये : मकर संक्रांति

चलो आज हम अपने ख़्वाब बाट ले
साथ मिल कर तिल और गुड़ चाट ले |

बोयी थी जो ख़लिश पिछले बरस
वोह अब पक़ चुकी होगी मेरे दोस्त ,
कुछ देर आज शाम साथ बैठ,
ला अब वोह फ़सल भी काट ले |

ग़िले होंगे और होंगे, शिकवे भी
न मै रखू न तू मन मे रख ,
थोड़ी देर तक मेरी ही सुन ले
फ़िर तेरी बारी, चाहे तो डांट ले |

चल करते है सौदा अबके बरस
कुछ इस तरह, कुछ उस तरह,
या तो मै तेरी डोर संभाल लू
या इस बार तू मेरी पतंग काट ले |

साल सिर्फ़ अभी शुरू भर हुआ है
और इरादों की पहली फ़सल है,
जा वादों की छन्नी ले आ
और सिर्फ अच्छा वक़्त छाँट ले |

चल इस बार सारी रेवड़ियाँ तेरी
मगर कमबख्त लड्डू तो आधे बाट ले

चलो आज हम अपने ख़्वाब बाट ले
साथ मिल के तिल और गुड़ चाट ले |


-गौरव : मकर संक्रांति //२०११//

1 comment:

manish badkas said...

waah bhai waah
waah bhai waah
gaurav ki patang
waah bhai waah...