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Sunday, June 26, 2011

है तू कहाँ ?



आखोँ के मौसम भीगे-भीगे से
फिर क्यूँ यह दिन रीते-रीते से

तेरी आहट, आस है
तेरी चाहत, प्यास है
बाँवरे-बाँवरे से दिन
शामें भी उदास है
है तू कहाँ ?

जुल्फों के साये महके-महके से
बिन तेरे अरमान बहके बहके से

कैसी यह दूरी
साँसे बनी मज़बूरी
मर-मिटा तुझ पर
क्यों जीना फिर जरुरी
है तू कहाँ ?

बाँहे तेरी मखमली-मखमली सी
बिन तेरे हर रात खल-बली सी

अब सिर्फ सलवटें है
बेचैन सारी करवटें
कटी रात आखों में
या रात हम कटे है
है तू कहाँ ?


© Copyright 2011,  GauRav Gupta