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Saturday, July 30, 2011

वोह किताब़

कल शाम
याद की वो पुरानी
किताब़ फिर मिली

हर सफ़े पर
ज्यादा कोशिश कियें बगैर
तेरा नाम ढूँढ लिया मैंने

कुछ सफ़ों के बीच
दर्ज थे सूखें गुलाब़
तेरी मुलाकातें दर्ज थी
कहीं थी गुमशुदा स्याही
शायद थी शामें
जो एक क़र्ज़ थी

कुछ पन्नों के
कोने कटे थे
आधें थे या
पौने फ़़टे थे
मुलाकात के वोह लम्हें
शायद तकरार में बटें थे

कुछ सफ़ों के
कौने मुड़े थे
सोचा होगा
वापिस लौटूंगा एक दिन
जी लूँगा एक बार फिर

लौटा हूँ उन्हीं कौनों पर
सोचता हूँ तुझे आगाज़ दू
किताब़ में कुछ नये सफ़े
फिर से जोड़ दू

© Copyright 2011,  GauRav Gupta

Wednesday, July 27, 2011

तेरे वो किस्से


तेरे वो किस्से 
कहूं  मै  किस से 
मेरी  जुबां पे  
चुप है कब से 

                तेरे वो किस्से 
               मेरे सज़दे  तेरे करम से 
               इश्क सबक, तेरे मद़रसे 

तेरी वो बातें 
आयी है जब से 
मेरी जुबां पे 
छुपाती हूँ  सबसे 

               तेरे वो किस्से 
               मेरे सज़दे  तेरे करम से 
               इश्क सबक, तेरे मद़रसे 


मोरा मन आँगन 
सूखा है कब से 
बन जाओ बदरियाँ
बारिश को तरसे 

              तेरे वो किस्से
              मांगू सावन इक हक से 
              बरसों तुम, हर तरफ से  

तेरे वो इशारे 
जीती हूँ उनसे 
हर सूँ  नज़ारे 
मर जाऊं शर्म से 

           तेरे वो किस्से
           मरती  हूँ तेरी फ़िक़र से
          जीती   हूँ तेरे फ़ज़ल  से  
    
तेरे वो किस्से

कहूं  मै  किस से 


© Copyright 2011,  GauRav Gupta