Pages

Thursday, November 24, 2011

ख़्वाब


हर सांस-सांस में तेरा, अहसास ही रहे 
नींद मेरी, ख़्वाब तेरे, आस-पास ही रहे 

मिलता तक नहीं, और ख़ामोश भी रहता हूँ 
सोचता हूँ जब मिलू  ,कहने को खास ही रहे

गुफ्तगू   सही न कर,  शिकायते ही कर ले 
क्यों मुझसे मेरा ज़माना  इस कदर उदास रहे 

कुछ समझेंगे इन्हें, सिर्फ चंद अशा़र भर मेरे
तू समझ, अहसास बदन है, ग़ज़ल लिबा़स रहे