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Monday, November 19, 2012

एक गाँव


दूर कही, एक गाँव है
आसमानी सी छाँव है
पीपल-पीपल रहे चबूतरे
नदी किनारे एक नाँव है |

किनारे बैठा, मन कही
बाट जोहता, सुनता नहीं
भँवर बने निगाह से
यादों के यही काम है |

धडकनों के शोर में
सुन न पाउ आहटें
शोर कहेधड़कन कहे
यह आहट तेरी, 
  तेरे ही पाँव है |


धूंप सा दर्द, था सीने में
वहीं चमक थी, जीने में
शाम जो पिघली आँखों से
आँखों के खाली गाँव है |

दूर कही, वही एक गाँव है |


© Copyright 2012,  GauRav Gupta

Tuesday, November 13, 2012

यह अमावस, कुछ पावस है !!


यह अमावस 
कुछ पावस है 
यह वोह रात नहीं,
जिसमे रौशनी की बात नहीं !

आज फिर चढेगा  सूरज 
दिन के माथे 
और उतरेगा भी 
सोचेगा, कर्म पूरा हुआ 
आखिर रौशनी से भरा 
एक और दिन दिया 
मेरा धर्म पूरा हुआ   

और चाँद,
  जाने किस बात पर 
शर्माया या  ऐंठा है  
आज  काम पर ना आया 
घर पर बैठा  है 

पर बात चल रही  थी 
रौशनी की !

सूरज ने अपना  कर्म,  पूरा  समझा  
चाँद ने अपनी  शर्म, अधूरी  समझा 

वोह शाम थी 
जिसने उजाले के मर्म को समझा 
लौटते हुए सूरज से 
ले लिया रौशनी  का गमछा 

उजाले की तिजोरी की चाबियाँ 
सूरज ने यह कह  कर दे दी 
"पहरेदारी  की बात है 
ध्यान से काम करना 
देख अँधेरी स्याह  रात है
बड़ा  काम है 
दिन से शाम करना "


और शाम 
उसने कुछ अलग किया है 
तिजोरी की चाबियाँ सौप दी उसे 
जिसने उसे विश्वास  दिया है 
और वोह 'दिया
लिखेगा एक नया इतिहास 
क्योकि 
अब जब पहरेदारी की बात होगी 
शायद  इस  बाती की
इस दिए की बिसात होगी 

रात भर  तिमिर से लड़ कर   
शाम का विश्वास  जिसने जिया 
जो घुलता रहा खुद अकेला 
रोशन हर आँगन जिसने दिया 

दीया !!