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Monday, November 19, 2012

एक गाँव


दूर कही, एक गाँव है
आसमानी सी छाँव है
पीपल-पीपल रहे चबूतरे
नदी किनारे एक नाँव है |

किनारे बैठा, मन कही
बाट जोहता, सुनता नहीं
भँवर बने निगाह से
यादों के यही काम है |

धडकनों के शोर में
सुन न पाउ आहटें
शोर कहेधड़कन कहे
यह आहट तेरी, 
  तेरे ही पाँव है |


धूंप सा दर्द, था सीने में
वहीं चमक थी, जीने में
शाम जो पिघली आँखों से
आँखों के खाली गाँव है |

दूर कही, वही एक गाँव है |


© Copyright 2012,  GauRav Gupta

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