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Saturday, October 12, 2013

उड़ जा !

चिड़ियाँ ओ चिड़ियाँ
उड़ जा री चिड़ियाँ
बांधें ना तुझको, मोरी नज़रियाँ

पंख है ये जो तेरे
जैसे अरमान भी मेरे
फैला के उड़ जा, शाम-सवेरे

बादल की सखी बन
करले थोडा सा जतन
उड़ जा री चिड़ियाँ
बिसरा के मोरी अटरियाँ

हवाओं की बात सुन
तजदे माटी के रंग
रच इक उड़ती सुखन
उड़ जा री चिड़ियाँ



© Copyright 2013,  GauRav Gupta

1 comment:

महेश शर्मा MAHESH SHARMA said...

bahut khoob....chidiya-nazriya-atariya hee behtar hoga, chandra bindu aavashyak nahin....