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Tuesday, April 7, 2015

मैं कैसे लिखूं ये गीत नया


मैं कैसे लिखूं ये गीत नया
कैसे कह दू दास्तान
आखों में जो नहीं अक्स तेरा
ख़ामोश भी तेरी जुबान

लिखे थे ख़त जो तेरी याद में
सारे के सारे धुंधला ही गये
मिलती ही नहीं तस्वीर तेरी
यादें भी रख कर भूल गया

मैं कैसे लिखूं ये गीत नया
कैसे कह दू दास्तान

रूठे थे जो तुम ख्व़ाब में
ख़्वाब ही मानो रूठ गये
प्यासी सी रही शब मेरी
दिन भी सूखा बीत गया

मैं कैसे लिखूं ये गीत नया
कैसे कह दू दास्तान

सोचा था फिर इस रात में
बनाऊगा मैं अक्स तेरा
कहाँ से लाऊ स्याह चाँदनी
बनता नहीं अब्र कागज़ नया

मैं कैसे लिखूं ये गीत नया

कैसे कह दू दास्तान

© Copyright 2015,  GauRav Gupta